Thursday, March 29, 2018
Wednesday, March 28, 2018
गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम पर जारी होगा 350 रुपये का सिक्का
Monday, March 26, 2018
Lucky Winner of Gurmat Sunday Quiz No.89
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ*
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫ਼ਤਹਿ*
ਗੁਰਮਤਿ ਸੰਡੇ ਕੁਇਜ਼ ਨੰ: 89
ਸਹੀ ਜੁਆਬ ਹੈ
*C. ਬਚਿੱਤਰ ਸਿੰਘ ਨੇ*
ਅਤੇ ਲੱਕੀ ਵਿੰਨਰ ਹਨ
ਪਹਲੇ ਇਨਾਮ ਲਈ...
*ਹਰਦਿਆਲ ਸਿੰਘ*
ਨਵੀ ਦਿੱਲੀ
9810162048
ਦੂਜੇ ਇਨਾਮ ਲਈ...
*ਅਮਰਜੀਤ ਕੌਰ*
ਅਲਵਰ (ਰਾਜ.)
(ਬੀਬੀਆਂ ਦਾ ਨੰਬਰ ਨਹੀਂ ਦੱਸਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ)
ਤੀਜੇ ਇਨਾਮ ਲਈ...
*ਹਰਜੋਤ ਸਿੰਘ*
ਨਵੀ ਦਿੱਲੀ
8826016160
ਸਾਰੇ ਵਿੰਨਰਸ ਨੂੰ ਵਧਾਈ
*ਵਿੰਨਰ ਆਪਣਾ... ਕੋਈ ਦੂਜਾ ਨੰਬਰ ਰਿਚਾਰਜ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹਨ*
ਨੋਟ: 5pm ਤੱਕ ਸਹੀ ਭੇਜੇ ਗਏ ਜੁਆਬ ਦਾ ਡਰਾਅ ਨਿਕਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲੱਕੀ ਡਰਾਅ ਰਾਂਹੀ ਵਿੰਨਰ ਚੁਣੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ
ਅਗਲੇ ਐਤਵਾਰ ਲਈ ਆਪ ਸਭ ਨੂੰ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾ
ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸੁਆਲ ਦੇ ਹੇਠ ਲਿਖੇ T&C ਵੀ ਪੜੋ ਜੀ
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ*
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਿਹ*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Sunday, March 25, 2018
Saturday, March 24, 2018
सिख राज: इतिहास के पन्नो से
देखना कही शोर मे अपना इतिहास न भूल जाना : आज के दिन हमारे पुरखो ने "लाल किले" पर खालसाई परचम लहरा
के दिल्ली #फतेह किया था
11 मार्च 1783 को सरदार बघेल सिंह की अगवाई मे लगभग 30,000 हथियारबंद सिक्खों ने दिल्ली पर फतेह दर्ज कर #लाल किले पर खलसाई झंडा लहराया था ।
उस के बाद सुल्तान-ऐ-कौम सरदार जसा सिंघ #अलुवालिया को दीवान-ऐ-आम के तख्त पर बिठाया गया । फिर उस के बाद मुगल बादशाह शाह आमल-2 और सिक्खों के बीच समझौते की बात चली । सरदार बघेल सिंह ने सिक्ख गुरूओ से संबंधित इतिहासिक जगहों के ऊपर गुरुद्वारे बनाने का फैसला किया,और मुगल राज दी कुल आमदन का 12.5% टैक्स सिक्खो को भरने का इकरार किया गया ।सरदार बघेल सिंह अपने 4000 हथियारबंद घोड़सवार सिक्खों के साथ लगभग 8 महीने दिल्ली सब्जी मंडी इलाके में रुके और दिल्ली के प्रशाशन को अपने हाथों में ले लिया । उन्होंने सिक्ख गुरुओं से संबंधित 7 जगहों की निशानदेही की और सिर्फ 8 महिनो में गुरद्वारों की उसारी की ।। जिस में गुरुद्वारा सीस गंज साहिब, गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब, गुरुद्वारा बंगला साहिब, गुरुद्वारा बाला साहिब, गुरुद्वारा मंजू का टिल्ला, गुरुद्वारा साहिब मोतीबाग, गुरुद्वारा साहिब माता सुंदरी शामिल है ।
सरदार बघेल सिंह ने 8 महीने दिल्ली पर राज किया । सरदार बघेल सिंह के हथियारबंद घोड़ सवार सिक्ख दिन- रात दिल्ली की सड़कों पर पहरा देते हुए हर ऐक पर नजर रखते थे। दिल्ली के लोगो को अमन कानून का वो नज़ारा देखने को मिला जो उन्होंने पहले कभी नही देखा था । लोग चाहते थे कि सरदार बघेल सिंह दिल्ली'में का बादशाह बन कर रहे और सरदार बघेल सिंह के पास इतनी ताकतवर फ़ौज थी कि अगर वो चाहते तो राज कर सकते थे, पर वो अपने इकरार में रहे और दिसम्बर 1783 में वापस पंजाब आ गए ।
हिंदी तर्जमा
भाई इंदर सिंह घग्घा जी
की दीवार से धन्यवाद सहित । 🙏🙏
